logo

CM हेमंत सोरेन ने PM मोदी को लिखा पत्र, कहा- जनगणना में आदिवासी व सरना के लिए हो अलग धर्म कोड 

cm001211.jpg

रांची 

CM हेमंत सोरेन ने PM नरेंद्र मोदी पत्र लिखकर जारी जनगणना में आदिवासी और सरना के लिए अलग धर्म कोड की मांग की है। सोरेन ने पत्र में कहा है कि आप जनगणना कराने की पृष्ठभूमि से भली-भांति अवगत हैं। आपने सदैव देश के विकास में आकड़ों और वैज्ञानिक तथ्यों पर विशेष बल दिया है। किसी भी राष्ट्र की जनता, प्रक्षेत्र और क्षेत्र के विकास के लिए "तथ्य आधारित नीति" ही सर्वोत्तम मार्ग है, अन्यथा देश में असंतुलित विकास की परिस्थिति बनने की संभावना रहती है।
सोरेन ने आगे कहा, जनगणना 2027 की सम्पूर्ण कार्रवाई में राज्य सरकार हर प्रकार का सहयोग कर रही है एवं आज मैंने Self Enumeration कर आपके इस अभियान में छोटी सी भूमिका के निर्वहन करने का प्रयास किया। इस क्रम में मुझे यह जानकारी दी गयी है कि प्रथम चरण में अन्य तथ्यों के अतिरिक्त Household धारित करने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति या जनजाति का सदस्य है। सोरेन ने इसी आशय का पत्र राष्ट्रपति और झारखंड के राज्यपाल को भी लिखा है। 

जनगणना मात्र आंकड़ों की गणना नहीं

इसी क्रम में यह तथ्य उभर कर आया कि प्रत्येक नागरिक से जुड़े व्यक्तिगत आकड़े का संकलन द्वितीय चरण में किया जायेगा। वर्ष 2021 की जनगणना की पृष्ठभूमि में मैंने आपको सरना धर्म की पृष्ठभूमि तथा आदिवासी समुदाय के अपने सरना धर्म के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को दृष्टिपथ में रखते हुए आगामी जनगणना में आदिवासी समुदाय के लिए पृथक आदिवासी/सरना धर्म कोड का प्रावधान रखने का अनुरोध किया था।
मुझे उम्मीद है कि जनगणना के द्वितीय चरण में धर्म से संबंधित जानकारी से जुड़े प्रपत्र/कॉलम में राज्य की आकांक्षा, विधानसभा का संकल्प, सभी आदिवासी समाज की भावना एवं राज्य सरकार की ओर से मेरे द्वारा आपसे किये गये विशेष अनुरोध को ध्यान में रखते हुए आपके द्वारा गंभीरता से विचार किया जा रहा होगा। क्योंकि जनगणना मात्र आंकड़ों की गणना नहीं है बल्कि यह आंकड़ों की गहराई का भी विश्लेषण करती है, जिसका प्रयोग मुख्यतः नीति निर्धारण, कल्याणकारी कार्य, संवैधानिक संरक्षण तथा तथ्य आधारित प्रशासन में किया जाता है। किसी समाज की पहचान उसके सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, एवं सांस्कृतिक विशेषताओं से होती है। वहीं दूसरी ओर यह उस समाज के विकास से जुड़े सभी आयामों को प्रभावित भी करती है। 

आदिवासी पहचान के आधार पर बना झारखंड 
झारखण्ड राज्य का गठन उसकी आदिवासी पहचान के आधार पर ही हुई है। झारखण्ड राज्य की नीति, योजनाएं तथा निर्णय यहां के स्थानीय लोगों की भावना पर आधारित है जिसके केन्द्र में विभिन्न समुदाय खासकर आदिवासी समाज की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विशिष्टता है। ऐसी परिस्थिति में तथा इन सभी आयामों को जनगणना की प्रक्रिया में सम्मिलित किये जाने की आवश्यकता प्रतीत होती है। खासकर तब जबकि भारत तकनीकी क्षेत्र में अत्यंत विकसित स्थिति में है एवं सारे कार्य Digital तरीके से किये जा रहे हैं, ऐसे में धर्म के कॉलम में सरना धर्म को, अथवा अन्य ऐसे सदश्य धार्मिक अस्तित्व को मान्यता देते हुए अलग कोड दिये जाने से, आंकड़ों का संकलन बेहतर तरीके से किया जाना सुनिश्चित हो सकेगा।

Tags - CM Hemant Soren PM Modi Separate Religious Code Tribals